हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत एवं कार्यशाला

दिनांक- 11 अप्रैल से 13 अप्रैल 2016

स्थान- 1. एस.डी.एस. हायर सेकेण्डरी ग्राम खोड होलीपुर 2.शान्ति निकेतन स्कूल पिनाहट, 3. जी.डी.एम. इण्टर काॅलेज ग्राम बिजकौली 4.बाह पब्लिक स्कूल, बाह 5. जनता आदर्श इण्टर कॉलेज, चिरहुली 6. दिल्ली पब्लिक स्कूल, शिकोहाबाद 7. हिन्द परिसर स्थित संस्कृति भवन शिकोहाबाद

आमंत्रित कलाकार- श्री अमजद अली खान एवं सहयोगी कलाकार ज़हीन ख़ान (तबला) एंव आरिफ़ ख़ान (हारमोनियम)

संयोजन- स्पिक मैके चैप्टर, शिकोहाबाद एवं शब्दम्

जो श्याम आएंगे ब्रज में पलट के, खेलूंगी होली उनसे में डट के.............. राग पहाडी प्रस्तुति देकर अमजद अली खान ने बहाई संगीत की बयार

”शब्दम्” एवं युवा पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक परम्परा से उसके मूल रूप में परिचित कराने के लिए कार्यरत संस्था स्पिक मैके चैप्टर शिकोहाबाद के संयुक्त तत्वाधान में फिरोजाबाद एवं आगरा जनपद के विभिन्न विद्यालय/महाविद्यालयों में शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का आयोजन आगरा जिले के चम्बल के पिछड़े एवं सुदूर क्षेत्र में स्थापित एस.डी.एस. हायर सेकेण्डरी, ग्राम-खोड होलीपुर, शान्ति निकेतन स्कूल पिनाहट, जी.डी.एम. इण्टर कॉलेज ग्राम बिजकौली, बाह पब्लिक स्कूल, बाह आदि क्षेत्रों में जहां कभी बन्दूकों की आवाजें गूजतीं थी उस क्षेत्र के विद्यालयों में युवा पीढ़ी के मध्य आज़ादी के बाद पहली बार जब शास्त्रीय संगीत की धुनें और रागें गंजीं तो लोगों को आश्चर्य के साथ खुशी परवान चढ़ी। कला, कलाकार एवं श्रोता के मध्य जो सम्बन्ध स्थापित हुआ उसकी गूँज न केवल लोगों के ज़हन तक पहुँची बल्कि चम्बल के बीहड़, पेड़-पौधे, पक्षी और चम्बल नदी भी उनके राग और धुन से स्वयं को झंकृत किए।

इसके बाद फिरोजाबाद जनपद के जनता आदर्श इण्टर कॉलेज, चिरहुली एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल शिकोहाबाद एवं हिन्द परिसर स्थित संस्कृति भवन में आयोजित किया गया। उपर्युक्त सभी स्थानों में लगभग 3300 छात्र-छात्राओं एवं इस कार्यशाला के माध्यम से संगीत की बारीकियों का प्रशिक्षण लिया। शिक्षकों एवं अन्य जनों ने उनकी शास्त्रीय प्रस्तुतियों का आनन्द लिया।

किराना घराने के अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रख्यात हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायक अमजद अली खान द्वारा राग मिया की टोड़ी ‘‘अल्ला जाने मौला जाने.................. के राग के साथ ठुमरी ‘रंग सारी गुलाबी चुनरिया रे मोते मारे नजर सँवरिया रे’ एवं सा नी धा पा तथा राग पहाड़ी में जो श्याम आएंगे ब्रज पलट के, खेलूगीं होली उनसे में डट के......, रंग डारूगीं-डारूगीं नन्द के लालन पर होली तथा ‘एही ठइंया मोतिया हिराय गई ले रामा कहंवा में ढूढू’’ चैती तथा ख्याल प्रस्तुत कर छात्र-छात्राओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को संगीत के बारे में बताते हुए कहा कि सुरताल गीत और वाद्य ही संगीत है। जब यह सब एक साथ चलते हैं तो वह संगीत कहलाता है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वाहन किया कि हमारी शास्त्रीय विद्या ही हमारी धरोहर है इसे युवा पीढ़ी को संजो कर रखना है। शिक्षकों, संगीत प्रेमियों ने भी हर्ष एवं उल्लास के साथ कार्यक्रम का आनन्द लिया।

शास्त्रीय विद्या को जन-जन तक पहुँचाने के लिए स्पिक मैके एवं शब्दम् के प्रयास की सार्थकता को लोगों ने सराहा।

अमजद अली खान

अमजद अली खान हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के उभरते वोकल कलाकार हैं। इन्होंने बहुत कम समय में संगीत के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त की है। इनका जन्म किराना घराना के प्रसिद्ध संगीतकारों के परिवार में हुआ है। इनके पिता उस्ताद अख़्तर नवाज़ खां साहब एक प्रसिद्ध गायक रहे हैं। इन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा अपने मामा बन्दिश नवाब, मश्कूर अली खां साहब और उस्ताद मुबारक अली खां साहब से प्राप्त की है।

अमजद अली खान आॅल इण्डिया रेडियो तथा दिल्ली दूरदर्शन के ए गे्रड के कलाकारों की श्रेणी में आते हैं। टीवी सीरियल जैसे शरीके ग़ालिब, एहसास परम्परा, कृष्ण मूर्ति आदि में पाश्र्व गायन के रूप में अहम भूमिका निभायी है। विदेशों में भी जैसे चाइना एशिया महोत्सव 2004, नमस्ते इण्डिया जापान, वीना म्यूजिकल फेस्टीवल स्विटज़रलेण्ड़, ओलम्पिक सैरीमनी लन्दन में अपने प्रोग्राम से ख्याति प्राप्त की है।

बहुत सारे प्रख्यात कवियों जैसे रवीन्द्र नाथ टैगोर, मिर्ज़ा ग़ालिब, रसखान एवं अमीर ख़ु़सरो की कविताओं के लिए संगीत कम्पोज़ किया है। इन्होंने अपने कैरियर को बहुत सारे अवार्ड जैसे - भारतरत्न पण्डित भीमसेन जोशी नेशनल अवार्ड, बेस्ट वोकल अवार्ड, झंकार म्यूजिक अवार्ड, सुरों के सिलसिले, हरिवल्लभ एंव काका साहिब म्यूजिक अवार्ड के अलावा अन्य कई अवार्डों से सुशोभित किया है।

अमज़द अली खान साहब किराना घराना म्यूजिक एकेडमी के संस्थापक हैं। जो भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढावा देने के लिए अग्रसर साबित हुयी है। आपका संगीत एवं मानवीय विश्वासों में उत्साह बराबर बना रहता है।

वंचित एवं असहाय बच्चों को निःशुल्क संगीत की शिक्षा प्रदान करते हैं। आपकी प्रबल इच्छा है कि उन लोगों को एक मंच दिला सकें जो योग्य तथा असहाय हैं।

फोटो परिचय-

प्रस्तुति देते हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायक अमजद अली खान।

चम्बल क्षेत्र के शिक्षण संस्थान में कार्यशाला के दौरान अमजद अली खान।

दिल्ली पब्लिक स्कूल में प्रस्तुति देते अमज़द अलीखान एवं साथी कलाकार।

बाह पब्लिक स्कूल, बाह में प्रस्तुति देते कलाकार।

एस.डी.एस. हायर सेकेण्डरी, जनता आदर्श इण्टर कॉलेज एवं जी.डी.एम. इण्टर कॉलेज की कुछ झलकियां।

शान्ति निकेतन स्कूल पिनाहट के छात्र-छात्राओं के साथ अमज़द अली खान एवं गणमान्य।


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