भारतीय शास्त्रीय (भरतनाट्यम्) नृत्य प्रदर्शन एवं कार्यशाला

कार्यक्रम : भारतीय शास्त्रीय (भरतनाट्यम्) नृत्य प्रदर्शन एवं कार्यशाला

दिनांक : 04 मई 2016 से 6 मई 2016

स्थान : शिकोहाबाद, सिरसागंज (विद्यालय शिकोहाबाद-पुरातन सरस्वती विद्यामन्दिर, पालीवाल विद्या निकेतन, राज काॅन्वेन्ट स्कूल, सिरसागंज-ब्राइट स्काॅलर्स एकेडमी, क्षेत्रिय इण्टर काॅलेज, देवशरण विद्या निकेतन)

आमंत्रित कलाकार : दक्षिणा वैद्यनाथन एवं देवोस्मिता ठाकुर

संयोजन : स्पिक मैके चेप्टर, शिकोहाबाद एवं शब्दम्

शब्दम् एवं स्पिक मैके के संयुक्त तत्त्वाधान की श्रृंखला में 6 विद्यालयों में ‘भरतनाट्य’ नृत्य एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रत्येक विद्यालय में कार्यक्रम का शुभारम्भ दीपप्रज्ज्वलन एवं माँ भारती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इन नृत्य-कार्यशालाओं के आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय संगीत से जोडना है।

जनपद फिरोजाबाद के शिकोहाबाद स्थित पुरातन सरस्वती विद्यामन्दिर, पालीवाल विद्या निकेतन, राज काॅन्वेन्ट स्कूल एवं सिरसागंज स्थित क्षेत्रिय इण्टर काॅलेज, ब्राइट स्काॅलर्स एकेडमी, रामशरण विद्या निकेतन में सुप्रसिद्ध नृत्यांगना दक्षिणा वैद्यनाथन ने कृष्ण बाल लीला मंचन एवं दुर्गा के स्वरूप की भाव भंगिमाओं तथा शिवजी के अर्द्धनारीश्वर रूप में ताण्डव नृत्य का प्रदर्शन एवं महाभारत के द्रौपदी चीर हरण को अपने नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत कर उपस्थि छात्र-छात्राओं और विद्यालय के अध्यापकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नृत्यांगना छात्र-छात्राओं को सभी विद्यालयों में भूमि प्रणाम, अर्द्धनारीश्वर, चेहरे की क्षण क्षण परिवत्रित भाव भंगिमाओं का अभ्यास कराया और पृथ्वी को स्वच्छ एंव सुन्दर रखने की शपथ दिलायी। उनकी साथी कालाकार देवोस्मिता ने छात्र-छात्राओं को ‘भरतनाटयम्’ नृत्य की बारीकियों और हस्त एवं चेहरों की भाव मुद्रओं का अभ्यास कराया। विद्यार्थियों ने बडे़ उत्साह के साथ नृत्य को सीखा और स्वयं प्रदर्शन भी किया।

छात्र-छात्राएँ, अध्यापक एवं अन्य गण्यमान्यों सहित लगभग 3000 लोग इस कार्यशालाओं से लाभान्वित हुए। विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने स्पिक मैके एवं शब्दम् का धन्यवाद करते हुए कहा कि भरतनाट्यम् नृत्य हमारी भारतीय संस्कृति की धरोहर है, इस तरह के आयोजन, हमारे विद्यालयों में समय-समय पर होते रहें, जिससे विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति एवं कला के प्रति जागरूकता बढ़े और उन्हें अधिक से अधिक अपनायें।

परिचय दक्षिणा वैद्यनाथन

दक्षिणा वैद्यनाथन भरतनाट्îम् के एक प्रख्यात परिवार से आती हैं । उन्होंने अपनी माता की गुरू डॉ सरोजा वैद्यनाथन (पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित) और अपनी मां रमा वैद्यनाथन के संरक्षण के तहत अपने ही घर में गणेश नाट्यालय से श्ऱम साध्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

आपको 2003 एवं 2014 में भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा सीसीआरटी छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया। 2005 में ‘यंग एचीवर्स’ श्रेणी में ‘कल्पना चावला अवार्ड,’ 2015 में OYSS द्वारा ‘निर्भया पुरस्कार, और भारतीय शास़्त्रीय नृत्य में योगदान के लिए ट्रिनिटी आर्ट्स चेन्नई द्वारा उपर्युक्त नाट्य रत्न से विभूषित किया गया। आप इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से भरतनाट्यम में डिप्लोमा धारक और प्रौद्योगिकी के वेल्लोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालोजी वेल्लोर से इलेक्ट्रानिक्स एवं संचार में स्नातक है।

दक्षिणा जी सक्रिय रूप से गणेश नाट्यालय में भरतनाट्îम का प्रशिक्षण देती हैं और आपको कोरियोग्राफी की कई नृत्य प्रस्तुतियों को स्टेप में शामिल किया गया है। आपने शून्य से अनंत, नक्षत्र और कर्म के न्यूटन के नियम पर तीन समूह प्रस्तुतियों का निर्देशन किया है। उन्होंने एकल प्रस्तुतियों क्लियोपेट्रा और सूरपंख को भरतनाट्îम् शैली के भीतर किया है।

दक्षिाणा जी स्पिक मैके के माध्यम से सक्रिय रूप से देश के बाहर एवं भीतर विभिन्न कार्यशालाओं में प्रदर्शन किया है। आप संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत, मलेशिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के लिए और सभी विभिन्न प्रदर्शन पर्यटन के लिए शौर्य के साथ भारत भर में किया गया है। राष्ट्रीय खेल 2015 में भी आपने प्रस्तुति दी है। आप भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के साथ एक पैनल में शामिल कलाकार है।

नृत्य की प्रस्तुति देतीं दक्षिणा बैद्यनाथन।

नृत्य की मुद्रा में दक्षिणा बैद्यनाथन।

भरतनाट्य नृत्य कार्यशाला का दृश्य।

विद्यार्थियों को नृत्य की बारीकियां सिखातीं नृत्यांगना।

विद्यार्थियों के साथ नृत्य की मुद्रा में कलाकार।

नृत्य को ध्यान से देखते स्कूली छात्र-छात्राएं।

छात्रों के साथ समूह छायांकन।


shabdam hindi prose poetry dance and art

next article