शब्दम् दस दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर

दिनांक- 1 जून 2016 से 10 जून 2016

स्थान- हिन्द परिसर स्थित, संस्कृति भवन एवं सिलाई केन्द्र

दस दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर ने दी, महिलाओं व बालिकाओं, स्वावलम्बी बनने की प्रेरणा

शब्दम् संस्था ने पिछले वर्ष ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन किया था। पिछले वर्ष की कुछ छात्राएं, लगातार ग्रीष्मकालीन शिविर को लेकर सम्पर्क में थीं। इस वर्ष संस्था ने 1 जून से 10 जून तक ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन किया। ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्देश्य, सिलाई कला, पाक कला, सौन्दर्यीकरण, मेंहँदी कला के माध्यम से छात्राओं को स्वावलम्बी बनाना था, जिससे वे इन कलाओं के माध्यम से रोजगार अर्जित कर सकें।

निम्न कलाएं सिखायी गईं।

सिलाई कला - शिक्षिका मधु शुक्ला ने सर्वप्रथम छात्राओं को मशीन के रख-रखाव तथा मशीन पर किस प्रकार कार्य किया जाता है, समझाया। इसके बाद सिलाई के उपयोग में आने वाली सभी सामग्रियों को बताया। डबल तनी वाले बैग, स्पंज बैग, साधारण बैग, पेटीकोट, ब्लाउज बनाना सिखाया।

पाक कला - शिक्षिका गरिमा शुक्ला ने सर्वप्रथम छात्राओं को बताया कि पाक कला में यह विशेष ध्यान रखना है कि आप जो भी बनाएं, वह आपके स्वास्थ्य के अनुकूल हो। मसाले, तेल एवं मिर्च का मिश्रण बनने वाली मात्रा के अनुकूल ही होना चाहिए। उन्होंने उत्पम, कश्मीरी दम आलू, बेसन का ढोकला, पंजाबी छोले, दाल मखनी, फ्रेंच फ्राइड राइस बनाने की विधि सिखायी। अन्तिम दिन सभी छात्राओं को प्रत्येक व्यंजन की लिखित रेसिपी दी गई।

सौन्दर्यीकरण - शिक्षिका गरिमा शुक्ला ने सौन्दर्यीकरण कला के अंतर्गत छात्राओं को बताया कि किस प्रकार अच्छा मेकअप आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है बल्कि आपको रचनात्मक और कलात्मक भी बनाता है। सौन्दर्यीकरण कला के अंतर्गत थ्रेडिंग, केश सज्जा, फेशियल ब्लीच, वेक्सीन, मेनीक्योर, पेडीक्योर, साधारण साड़ी, बंगाली साड़ी, सीधे पल्ले वाली साड़ी, महाराष्ट्रीय साड़ी, एवं फिश वाली साड़ी सिखायी।

मेंहँदी कला - शिक्षिका अम्ृषा सिंह ने छात्राओं को बताया कि मेंहँदी कला आज एक बड़े व्यवसाय के रूप में बदल चुकी है यदि आप अच्छी मेंहँदी लगाना सीख जाएं तो आप इस कला को रोजगार के रूप में भी अपना सकते हैं। साथ ही इस कला को सीखने से आप स्वतः ही अल्पना बनाना सीख जाएंगे। इस कला के अंतर्गत अरेविक, ब्राइडल, फुलहेण्ड़, राजस्थानी, आगे हाथ-पीछे हाथ, किसी भी शुभ अवसर पर लगायी जाने वाली मेंहँदी की विधि को सिखाया।

ग्रीष्मकालीन शिविर के आखिरी दिन, छात्राओं ने सीखी हुयी कला को कैटवाॅक के माध्यम से एवं रंगारंग कार्यक्रम कर प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर शब्दम् अध्यक्ष किरण बजाज ने फोन पर अपने संदेश में छात्राओं के लिए सुखद और उज्जवल भविष्य की कामना की।

पत्राचार एवं बैंकिग - शब्दम् वरिष्ठ सलाहकार श्री मंज़र-उल वासै द्वारा समर कैम्प में अंतिम दो दिन, सामान्य पत्राचार, बैंकिग इत्यादि की जानकारी दी गई।

समर कैम्प में भाग लीं छात्राओं की कलम से -

ऊषा देवी उम्र-35 वर्ष-
"सुबह उठना, घर के काम करना, बच्चों को संभालना, पति का लंच तैयार करना, शाम को भी कुछ इसी प्रकार के घर के कार्य, शायद इस ग्रीष्मकालीन शिविर से पहले मेरे जीवन का सच यही था। जब मैंने इस ग्रीष्मकालीन शिविर में भाग लिया तो मेरे जीवन के कई सच बदल गए, अब मुझे समझ में आ गया है कि यदि आप जीवन जीने की कलाएँ सीख लेती हैं, तो आप स्वतः ही खुद को स्वावलम्बी अनुभव करती हैं और फिर ये रोजमर्रा के घर के कार्य भी रचनात्मक तरीके से आनन्द देते हुए पूरे होते हैं और जब जीवन में किसी कठिनाई का अनुभव होता है तो इन कलाओं के माध्यम से आप आमदनी भी अर्जित कर सकती हैं।"

करिश्मा उम्र-12 वर्ष-
मैंने पिछले वर्ष भी समर कैम्प में भाग लिया था, मेरा गांव नगला खंगर यहां से 22 किलोमीटर दूर है। मैं पिछले वर्ष से ही दीपक सर के सम्पर्क में थी। जैसे ही मुझे पता चला कि शब्दम् का ग्रीष्मकालीन शिविर प्रारम्भ होने वाला है। मैंने इसमें भाग लेने के लिए फाॅर्म भर दिया है। माधौगंज में मेरी नानी रहती है, मैं इस समर कैम्प के लिए अपनी नानी के यहा सं आ जाती हूँ।

आकांक्षा पाण्डेय, उम्र 10 वर्ष-
ग्रीष्मकालीन शिविर से पहले मैं चाय बनाना भी पसन्द नहीं करती थी, परन्तु यहां मैंने न केवल उत्पम बनाना सीखा बल्कि उसे घर पर जाकर बनाया, जिसदिन मैं इसे बना रही थी उस दिन मेरे घर पर धनिया खत्म हो गया था, मैं उत्पम बनाने को लेकर इतनी उत्साहित थी कि आस-पास के तीन-चार घरों में धनिया पूछा और आखिर में धनिया ढूढंकर मैंने सबसे पहले अपने बाबा को अपने हाथ से बना हुआ उत्पम खिलाया।

मेंहदी कला का प्रदर्शन करती बालिका।

मेंहदी लगे हुये हाथ का दृश्य।

मेंहदी लगाने का अभ्यास करतीं छात्राएं।

सौन्दर्यीकरण का दृश्य।

जूड बनाने की विधि सिखातीं शिक्षिका।

बाल बनाने की विभिन्न विधियों का अभ्यास करतीं छात्राएं।

मेनी क्योर विधि सीखतीं प्रतिभागी।

फेसियल करने की विधि को सिखातीं शिक्षिका।

सिलाई सीखतीं छात्राएं।

ढोकला बनाने की विधि को बतातीं शिक्षिका गरिमा शुक्ला।

बैकिंग एवं पत्राचार का ज्ञान देते श्री मंजर-उल वासै।

समूह छायांकन।

 

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